लेख
हर लेख निःशुल्क है, साधकों के लिए लिखा गया है, और तोराह के प्रामाणिक स्रोतों पर आधारित है।
धर्मतोराह क्या है, और सार्वभौमिक मार्ग कहाँ से शुरू होता है।
दो प्राचीन शब्द, एक सेतु: हमने संस्कृत के 'धर्म' और इब्रानी की 'तोराह' को एक साथ क्यों जोड़ा — और यह प्रकल्प किसलिए है।
02 नोआह की संतान कौन है?बनेई नोअख़ — नोआह की संतान: संसार की सबसे प्राचीन आध्यात्मिक पहचान, और उन ग़ैर-यहूदियों का बढ़ता हुआ वैश्विक आंदोलन जो सार्वभौमिक वाचा को जीते हैं।
अब्राहम की संतान और पूर्व की भूमि का प्राचीन बंधन।
उत्पत्ति में लिखा है कि अब्राहम ने अपने पुत्रों को उपहार देकर 'पूर्व की ओर, पूर्व के देश में' भेजा। पूर्व की ओर गए आध्यात्मिक ज्ञान के विषय में तलमूद और कबाला क्या कहते हैं — और आज के भारतीय साधकों के लिए इसका क्या अर्थ है।
02 भारत के यहूदी: दो हज़ार वर्ष, एक भी आँसू नहींकोचीन के यहूदी, बेने इस्राएल, बग़दादी, बनेई मेनाशे — भारत में यहूदी जीवन की कहानी, और क्यों दुनिया भर के यहूदी कहते हैं: भारत ने हमें कभी नहीं सताया।
सीनै पर्वत पर समस्त मानवता को दी गई सार्वभौमिक वाचा।
सात नियमों में पहला और सबसे गहरा: केवल अनंत सृष्टिकर्ता की सेवा — न कोई मूर्ति, न कोई प्रतिमा, न कोई मध्यस्थ। लाखों मंदिरों की भूमि को प्रेमपूर्वक अर्पित एक शिक्षा।
02 नाम का सम्मानदूसरा नियम: जीवन के स्रोत के प्रति श्रद्धा। परमेश्वर के विषय में बोले गए हमारे शब्द किसी व्यक्ति — और पूरे समाज — की आत्मा को कैसे गढ़ते हैं।
03 जीवन की पवित्रतातीसरा नियम: हत्या न करें। तोराह हर मनुष्य को एक सम्पूर्ण संसार क्यों कहती है — और यह बात हममें से हरेक से क्या माँगती है।
04 विवाह में निष्ठाचौथा नियम: वैवाहिक निष्ठा। तोराह पति-पत्नी के बंधन को संसार का सबसे पवित्र स्थान क्यों मानती है — और उसके साथ विश्वासघात को सबसे गहरी दरार।
05 ईमानदारी ही पवित्रता हैपाँचवाँ नियम: चोरी न करें। तोराह का यह विलक्षण दावा कि आपके धन-व्यवहार ही आपकी सच्ची आध्यात्मिक जीवनी हैं।
06 न्याय की व्यवस्थाछठा नियम: न्याय की स्थापना कीजिए। वाचा की एकमात्र विधायक आज्ञा — मानवता को ऐसे समाज बनाने हैं जहाँ सत्य की रक्षा हो और निर्बल सुरक्षित हों।
07 प्राणियों के प्रति दयासातवाँ नियम: जीवित पशु से लिया गया अंग कभी न खाएँ। वाचा की करुणा-रेखा — और प्रकृति में मानवता की भूमिका के विषय में तोराह की व्यापक दृष्टि।
उस जाति का संक्षिप्त इतिहास जिसने एक परमेश्वर का ज्ञान इतिहास में सँजोए रखा।
हितबोनेनूत — तोराह की चिंतन-पद्धति, हर आत्मा के लिए खुली।
तोराह की प्राचीन चिंतन-परंपरा — हितबोनेनूत — और वह आश्रमों में सिखाए जाने वाले ध्यान से कैसे भिन्न है: विलय नहीं, संबंध।
02 हितबोनेनूत: पहला अभ्यासपंद्रह मिनट का एक सरल, संपूर्ण यहूदी चिंतन-अभ्यास जिसे आप आज रात से आरंभ कर सकते हैं — न कोई छवि, न मंत्र, न मध्यस्थ। बस आप, और वह — जो इसी क्षण आपको अस्तित्व दे रहा है।
दुनिया एक शुभ दिशा में क्यों बढ़ रही है — और उसमें आपकी भूमिका।
इतिहास कहाँ जा रहा है, इसका तोराह का दर्शन: विश्व-शांति, न्याय और ईश्वर के सार्वभौमिक ज्ञान का युग — और नबी क्यों आग्रह करते हैं कि इसे लाने में हर राष्ट्र की भूमिका है।
02 यहूदी लोगों के साथ क्यों खड़े हों?'जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूँगा' — बाइबल का सबसे पुराना वचन, इतिहास का वह विचित्र क्रम जो इसे बार-बार सिद्ध करता आया है, और नोआह की संतान के लिए इस्राएल के साथ सच्ची साझेदारी का अर्थ।
03 राष्ट्रों के नाम रेबे का आह्वान1983 में लुबाविचेर रेबे ने वह किया जो दो हज़ार वर्षों में किसी यहूदी नेता ने नहीं किया था: उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने लोगों को आदेश दिया कि वे सार्वभौमिक वाचा समस्त मानवता को सिखाएँ। यह साइट उसी आह्वान का एक उत्तर है।
पहला क़दम उठाइए
साप्ताहिक कक्षा निःशुल्क है और सबके लिए खुली है, कहीं से भी। और यदि आप पहले केवल एक प्रश्न पूछना चाहें — वह भी उतना ही स्वागतयोग्य है।